Satyavan Samachar

तो क्या आजम खां को मरवाना चाहते, सपा महासचिव रामगोपाल यादव

सुधीर सिंह राजपूत औरैया ब्यूरो चीफ।।

बात पुरानी,महबूबा मुफ्ती बोली 370 हट गई, तो भारत का झंडा उठाने वाला नहीं रहेगा, 370 हटा दी गई। उमेश पाल मर्डर हुआ, अखिलेश दहाड़े, योगी माफिया से मिले हुए, माफिया को बढ़ावा दे रहे, अतीक को अहमदाबाद से खिंचवा लिया गया, मर्डर हो गया। अब सपा महासचिव रामगोपाल यादव बयान दे रहे, आजम खां का एनकाउंटर हुआ,फिर देखो क्या होता है। आखिर में सपा नेता चाहते क्या है, क्यों अपने ही साथी के लिए उकसावे वाली भाषा इस्तेमाल कर रहे, जानेंगे आगे।
सपा की बुनियाद MY( मुस्लिम, यादव) फैक्टर पर टिकी हुई है, MY (यादव वर्ग ) के निर्विवादित नेता के रूप में मुलायम ने अपनी पहचान बनाई, MY का (मुस्लिम) चेहरा सपा के लिए आजम बने,थोक वोट बैंक की नुमाइंदगी के चलते आजम का कद सपा में मुलायम के बाद दूसरे नंबर पर रहा। दूसरे नंबर की लड़ाई के लिए ही उस समय शिवपाल और आजम टकराते रहते थे, राजनैतिक मजबूरियों से आजम हमेशा शिवपाल पर भारी पड़े।समय बदला, मुलायम के बाद अखिलेश ने पार्टी की कमान संभाली, शिवपाल किनारे लगा दिए गए ।दूसरे नंबर की बात आई, तो आजम फिर भारी पड़े। मुलायम परिवार की लड़ाई में ,अखिलेश के साथ खड़े राम गोपाल की निगाहें पार्टी में दूसरे नंबर पर रहीं। उनके और अखिलेश के बीच, पार्टी में कद्दाबर केवल आजम ही हैं, यह वह जानते हैं। ऐसे समय सत्ताधारी पार्टी को चुनौती पूर्ण बयान (एनकाउंटर हुआ, फिर देखिए क्या होता है) कहीं दूसरे नंबर की लड़ाई खत्म करने का जरिया तो नहीं। सीधी सी बात, एनकाउंटर हो जाता है ,फिर आप क्या देखेंगे। आप यह कहें कि एनकाउंटर नहीं होना चाहिए तो समझ में आता है, कहना ”एनकाउंटर के बाद क्या होगा” समझ से परे है। ऐसा नहीं, सत्ताधारी दल को चुनौती देने के लिए रामगोपाल को मौके नहीं मिले, बहुत मौके आए। सरकार जाने के बाद अखिलेश पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे ,रामगोपाल ने तब नहीं कहा, भ्रष्टाचार में अखिलेश को जेल भेजिए, फिर देखिए क्या होता है। फिर मौका आया ,स्थानीय प्रशासन ने सैंफई में बड़े नेता के साथ कई नेताओं के अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाए,बुलडोजर पर चिल्लाने वाली पार्टी के बड़े नेता का बयान नहीं आया, की बुलडोजर चला कर दिखाओ, फिर देखिए ,क्या होगा । केवल आजम के के मामले में बहादुरी दिखा, सत्ता को चुनौती देना, सपा महासचिव राम गोपाल यादव की सोच की ,ईमानदारी पर प्रश्न चिन्ह लगाता है।

 

Prashant Yadav
Author: Prashant Yadav

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