ब्यूरो रिपोर्ट इटावा:
इटावा शहर से लगभग 02 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश को जोड़ने वाले रास्ते पर यमुना तट के निकट स्थित कालीवाह मंदिर देवी भक्तों का प्रमुख केंद्र है यह एक ऐसा मंदिर है जिसके बारे में मान्यता है कि यहां महाभारत काल का अमर पात्र अश्वत्थामा जाकर सबसे पहले पूजा करता है इस मंदिर का नवरात्रि के मौके पर खासा महत्व होता है, इस मंदिर में अपनी-अपनी मनोकामना को पूरा करने के इरादे से दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं, कालीवाह मंदिर के महंत बताते है इस मंदिर का अपना एक अलग महत्व है, यह करीब 600 वर्ष पुराना मंदिर है , उनका कहना है हम कई वर्षो से सेवा कर रहे है यहां लेकिन आज तक इस बात का पता नहीं लग सकता है, कि रात के अंधेरे में जब मंदिर को साफ कर दिया जाता है, सुबह गर्व ग्रह खोला जाता है उस समय मंदिर के भीतर ताजे फूल मिलते हैं जो इस बात को साबित करता है कोई अदृश्य रूप में आकर पूजा करता है कहा जाता है कि महाभारत की अमर पात्र अश्वत्थामा मंदिर में पूजा करने के लिए आते हैं इटावा जनपद की पावन धरती पर विख्यात कालीवाहन मन्दिर माना जाता है इस मंदिर पर चंबल और यमुना नदी के मध्य घने जंगल मे बना अद्भुत चमत्कार देखने को मिलते है यहाँ इतिहास में डकैतों का गढ़ माना जाता है जो काली वाह मन्दिर पर डकैतों का सबसे पहले घण्टे चढ़ाने का परम्पराएं रहती थी नामी डकैत इस मंदिर पर झंडा चढ़ाते थे इसी लिए मन्दिर का इतिहास गवाह है जो विश्व में काली वाह मन्दिर प्रसिद्ध है
