Satyavan Samachar

राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन माननीय न्यायमूर्ति श्री जयंत बनर्जी प्रशासनिक जज, जनपद आजमगढ़ की अध्यक्षता में एवं श्री संजीव शुक्ला, माननीय जनपद न्यायाधीश / अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आजमगढ़ व समस्त सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण, बैंक पदाधिकारीगण की उपस्थिति में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ किया गया।

आजमगढ़: 09 सितम्बर– जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आजमगढ़ के तत्वाधान में आज जनपद न्यायालय परिसर आजमगढ़ में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन माननीय न्यायमूर्ति श्री जयंत बनर्जी प्रशासनिक जज, जनपद आजमगढ़ की अध्यक्षता में एवं श्री संजीव शुक्ला, माननीय जनपद न्यायाधीश / अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आजमगढ़ व समस्त सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण, बैंक पदाधिकारीगण की उपस्थिति में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ किया गया। माननीय न्यायमूर्ति द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीपार्चन एवं पुष्पार्चन किया गया।
तत्क्रम में माननीय जनपद न्यायाधीश एवं न्यायिक अधिकारीगण द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीपार्चन एवं पुष्पार्चन किया गया।
माननीय न्यायमूर्ति ने कहा कि लोक अदालत आम आदमी के लिए उपलब्ध एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र है। यह एक मंच है जहाँ अदालत में लम्बित विवादों या ऐसे मामले जो अदालत तक पहुँचे नहीं है, को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाया जाता है। कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत लोक अदालत द्वारा किए गए अवार्ड को सिविल अदालत की डिक्री समझा जाता है और यह अंतिम और सभी दलों पर बाध्यकारी है तथा इसके खिलाफ किसी भी अदालत के समक्ष अपील वर्जित है।
माननीय न्यायमूर्ति ने बैंको द्वारा लगाये गये स्टाल का फीता काटकर प्री-लिटिगेशन वादों का शुभारम्भ किया गया। माननीय न्यायमूर्ति ने जनपद न्यायालय में नवनिर्मित ए०डी०आर० भवन में शिलापट्ट का अनावरण किया तथा ए०डी०आर० परिसर में माननीय न्यायमूर्ति द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया।
माननीय जनपद न्यायाधीश ने लोक अदालत की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह एक ऐसा माध्यम है, जिसमें किसी पक्ष की हार नहीं होती और सिविल मामलों में कोर्ट फीस भी सम्बन्धित पक्ष को वापस हो जाती है।
श्री अजय कुमार सिंह, पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण से कुल 52 वादों का निस्तारण किया गया। श्रीमती संदीपा यादव, अपर प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय संख्या – 02 द्वारा 31 वादों का एवं श्री प्रेम शंकर, अपर प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय संख्या-01 द्वारा 38 वादों सहित कुल 69 वादों का पारिवारिक न्यायालय द्वारा निस्तारण किया गया। श्री सतीश चन्द्र द्विवेदी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-01 द्वारा कुल 02 वादों का श्री जैनेन्द्र कुमार पाण्डेय, विशेष न्यायाधीश (एस०सी०/एसटी एक्ट द्वारा कुल 07 वादों का, श्री सन्तोष कुमार यादव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत द्वारा कुल 14 वादों का, श्री ओम प्रकाश वर्मा-III, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-03 द्वारा कुल 02 वादों का, श्री राम नरायन, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, पाक्सो एक्ट द्वारा कुल 02 वादों का, श्रीमती शैलजा राठी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, ई०सी० एक्ट द्वारा कुल 206 वादों का निस्तारण किया गया। पारिवारिक न्यायालय द्वारा अलग रह रहे दम्पत्तियों के वादों का निस्तारण कराकर उनको एक साथ रहने का, तथा दम्पत्तियों को आशीर्वाद देकर व माला पहनाकर विदा किया गया। श्री यशवन्त कुमार सरोज, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा कुल 3287 वादों का निस्तारण किया गया तथा 385250.00 रू० की धनराशि का अर्थदण्ड आरोपित किया गया। सुश्री अनीता, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नं0-10 द्वारा कुल 4099 वादों का निस्तारण किया गया। कार्यक्रम का संचालन न्यायिक मजिस्ट्रेट ओमश्री चौरसिया एवं मीनल वर्मा द्वारा किया गया।
इसके साथ ही राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न बैंकों तथा बी.एस.एन.एल. द्वारा भी स्टाल लगाकर प्री-लिटिगेशन के 1187 वादों का तथा जिला प्रशासन द्वारा प्रीलिटिगेशन स्तर पर 55960 वादों का निस्तारण किया गया। इस प्रकार इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 96525 वादों में से 80869 वादों का निस्तारण किया गया।

Prashant Yadav
Author: Prashant Yadav

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