Satyavan Samachar

एडल्ट कफ सिरप पीने से मासूम की मौत, प्रशासन ने दिखाई संवेदनशीलता.

एडल्ट कफ सिरप पीने से मासूम की मौत, प्रशासन ने दिखाई संवेदनशीलता बिधूना, औरैया। जनपद में एडल्ट कफ सिरप पीने से एक मासूम बच्चे की

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जिलाधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट बलरामपुर अरविंद सिंह के बेतुके आदेशों पर हाईकोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख।

आजमगढ़ संवाददाता : कतिपय पुलिस कर्मियों व थानाध्यक्षों के विरुद्ध उनके द्वारा किए गए अवैधानिक दंडात्मक कार्यवाही पर लगाई रोक। बिना बुलाए जिला मजिस्ट्रेट बलरामपुर की कोर्ट में मौजूदगी पर जताई गई कड़ी आपत्ति।

      जनपद बलरामपुर के जिलाधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट अरविंद सिंह ने अपने क्षेत्राधिकार के बाहर जाकर जनपद बलरामपुर के कई थानाध्यक्षों के विरुद्ध स्वयं ही नियमों के विपरीत जांच करवाकर पुलिस के कार्यों में अनाधिकृत रूप से हस्तक्षेप करते हुए पुलिस कर्मियों के विरुद्ध दंडात्मक आदेश पारित कर दिए थे। जबकि पुलिस अधिकारियों की दंड एवं अपील नियमावली 1991 में केवल पुलिस पुलिस अधीक्षक को दंड देने का अधिकार है। जिला मजिस्ट्रेट ने स्वयं को अनाधिकृत रूप से लिखित तौर पर “न्यायाधीश” घोषित करते हुए मनमाने एवं तानाशाही पूर्ण तरीके से दंड आदेश पारित किए, जिससे क्षुब्ध होकर सम्बंधित पुलिस कर्मियों ने अलग अलग अब तक कुल 4 रिट याचिकाएं माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ में योजित किया है। जिसमे माननीय उच्च न्यायालय के कोर्ट नम्बर 6 में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की तरफ से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता श्री उपेंद्र मिश्र, अधिवक्ता संजय सिंह सोमवंशी व अधिवक्ता संजय कुमार ने बहस किया। रोचक तथ्य यह रहा कि दौरान बहस बिना कोर्ट के बुलाए अरविंद सिंह जिला मजिस्ट्रेट बलरामपुर व पूर्व उपजिलाधिकारी उतरौला सन्तोष ओझा भी कोर्ट में मौजूद थे, जिस पर उनकी कोर्ट में अनाधिकृत मौजूदगी को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता ने कड़ी आपत्ति दर्ज की और बहस में कहा कि जिला मजिस्ट्रेट जो कि वर्तमान में बलरामपुर श्रावस्ती लोकसभा चुनाव का रिटर्निंग ऑफिसर है, वह जनपद को छोड़ कर यहां कैसे और किसके दिए पास पर कोर्ट के अंदर उपस्थित है। इस पर स्टेट ने किसी तरह जिलाधिकारी का बचाव किया। निर्णय के दौरान माननीय उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्था नमन सिंह बनाम स्टेट ऑफ यूपी के आलोक में कहा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट अथवा जिला मजिस्ट्रेट को किसी के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत किए जाने का आदेश देकर पुलिस और न्यायिक मजिस्ट्रेट को अधिकारिता में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नही है। और इसके साथ ही नियमावली 1991 के तहत वह पुलिस अधिकारियों को दंड नहीं दे सकते और न ही उनकी चरित्र पंजिका में टिप्पणी अंकित कर सकते हैं।

       प्राप्त सूचना अनुसार जिलाधिकारी बलरामपुर के ऐसे कार्यों और अविधिक आदेशों के कारण अन्य पीड़ित व क्षुब्ध पुलिस कर्मियों के द्वारा भी जिलाधिकारी बलरामपुर के विरुद्ध अलग अलग रिट याचिकाएं योजित किए जाने की प्रक्रिया की जा रही है। एवं जिलाधिकारी के ऐसे कृत्य से पुलिस विभाग में रोष व्याप्त है।

Prashant Yadav
Author: Prashant Yadav

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