Satyavan Samachar

जो पिछड़ा होगा ,वह नाम बदलेगा,, कह पिछड़ों को गाली दे गए अखिलेश

विरासत में मिली पुरानी सत्ता की याद में मदान्ध अखिलेश गाहे -बगाहे वर्ग-जाति पर टिप्पणियां कर लोगों के बड़े समूह को नाराज कर देतें हैं। अबकी बार उनके निशाने पर पिछड़ा वर्ग आ गया, इस वर्ग को एकजुट करने के लिए की जा रही यात्रा में अखिलेश ने ,इसी वर्ग के विरोध में बयान दे डाला। उन्होंने कहा जो पिछड़ा होगा ,वह नाम बदलेगा, इसका अखिलेश ने क्या अर्थ निकाला, वह जानें, लेकिन आम जनमानस इसको पिछड़ा वर्ग को ”दी गई गाली” मान रहा है। अखिलेश की अपरिपक्वता या भाषण तैयार करने वालों की गलती, जो भी हो, जल्द से जल्द सुधार करना होगा,अन्यथा परिणाम सपा को भुगतने होंगें।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश पिछड़ा दलित अल्पसंख्यकों को साधने के लिए सड़क यात्रा कर रहे ,पहली गलती यही कर दी,पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक को एकजुट करने के चक्कर में सामान्य वर्ग को दूर कर दिया।वहीं पिछड़ा वर्ग में इनकी स्वीकार्यता पहले ऐसी नहीं।पहले भाजपा की अग्रिम पंक्ति सामान्य वर्ग की होने के चलते, इनके नेता ”पिछड़ा वर्ग को” सवणों को ,गाली देकर एकजुट करते थे। आज भाजपा असल मायनों में पिछड़ों की ही पार्टी बन गई ,बड़े नेता नरेंद्र मोदी पिछड़ा वर्ग से हैं। अब जब पिछड़ा वर्ग भाजपा को ही अपनी पार्टी मान रहा तो पिछड़ों को भाजपा के खिलाफ समान्य वर्ग के लिए अनाप-शनाप बोल एकजुट नहीं किया जा सकता ,अखिलेश के सलाहकार यह नहीं समझ रहे।यह लोग आज भी पुराने फार्मूले पर चल , भाजपा से दूर हो रहे सामान्य वर्ग को फिर से भाजपा के करीब लाने का कार्य कर रहे हैं। बात पार्टी विचारधारा स्तर की हो गई ,अब चलते हैं राजनीतिक यात्रा की तरफ। PDA नाम से चल रही यात्रा में अखिलेश ने बयान दिया ”जो पिछड़ा होगा, वही नाम बदलेगा” उत्तर भारत में लड़ाई झगड़े में कह दिया जाता, कि ऐसा नहीं कर पाए तो नाम बदल लेंगे, मतलब नाम बदलना अपनी हार स्वीकारना या एक तरह से गाली मानी जाती है ।अखिलेश ने यह बयान जौनपुर के अस्पताल का नाम बदलने पर भाजपा के लिए दिया, लेकिन बयान के शब्द पिछड़ा वर्ग को प्रभावित कर गए । ” पिछड़ा नाम बदल लेता है” बयान पिछड़ा वर्ग के लिए एक तरह गाली है।गाली अखिलेश ने क्यों दी, इसके अलग-अलग मतलब निकाले जाने लगे। गैर यादव पिछड़ा वर्ग के नेता दबी जवान कह रहे अखिलेश को पिछड़ा वर्ग से नफरत है, वास्तव में अखिलेश की जाति ,पिछड़ी रही नहीं। पिछड़ा वर्ग के नाम से मिलने वाले आरक्षण एवं अन्य सरकारी लाभ सबसे ज्यादा अखिलेश की बिरादरी ने लिए, उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति सामान्य वर्ग से भी बेहतर है, इसलिए यह लोग वास्तविक पिछड़ा वर्ग के साथ बैठना उठाना खाना पसंद नहीं करते। चुनाव के समय पिछड़ा वर्ग एकजुट करने के नाम पर यात्राएं की जातीं, वहीं सरकार में आने पर यह केवल अपनी बिरादरी को ही लाभ पहुंचाते नजर आते हैं।

सुधीर सिंह राजपूत औरैया ब्यूरो चीफ।।।

Prashant Yadav
Author: Prashant Yadav

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