Satyavan Samachar

आज़मगढ़ जिला अस्पताल के शौचालय से नवजात शिशु का शव मिलने से मचा हड़कंप, पुलिस जांच में जुटी।

आज़मगढ़ जिला अस्पताल के शौचालय से नवजात शिशु का शव मिलने से मचा हड़कंप, पुलिस जांच में जुटी  आज़मगढ़ जिला अस्पताल के महिला वार्ड में

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प्राइवेट सेंटरों पर पहुंची बाहरी टीम लोगों में मचा हड़कंप।

प्राइवेट सेंटरों पर पहुंची बाहरी टीम लोगों में मचा हड़कंप

स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक का कहना नहीं ऐसी कोई बात नहीं कोई भी टीम जांच के लिए नहीं आई है।

सहजनवा तहसील क्षेत्र स्थित पाली ब्लाक अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली ठर्रा पार से सटे लगभग कुछ पैथोलॉजी व अल्ट्रासाउंड, व मानक विहीन प्राइवेट अस्पताल सालों से संचालित हो रहे हैं। 

सूत्रों के द्वारा मिली जानकारी के अनुसार आज अल्ट्रासाउंड का पैथोलॉजी सेंटर बंद होने के बाद मरीज़ सड़क पर टहलते और परेशान दिखाई दे रहे थे। पता चला अस्पताल परिसर के कर्मचारियों के द्वारा प्राइवेट सेंटरों की तस्वीर खींची गई। जिसकी वजह से लोग डर की वजह से दुकान बंद कर दिया उन्हें बताया क्या बाहर की टीम जांच करने आई है। वही जब इस संदर्भ में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात अधीक्षक सतीश सिंह से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा ऐसी कोई बात नहीं है। अब सोचने वाली बात यह है आखिरकार वह कौन लोग है जो स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार बन कर प्राइवेट सेंटरों पर जांच करने की बात कर रहे थे, फिलहाल ही मामला जांच का है जांच होने के बाद ही पता चल पाएगा, यह कौन लोग है,

वही कुछ डॉक्टर के द्वारा इनको चलाने में बेहतर सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। जो की सरकारी अस्पताल के कुछ गिने चुने डॉक्टरों द्वारा सरकारी पर्ची पर बाहर के अवैध पैथोलॉजी व अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर ऊपर जांच भी लिखा जाता है। इतना ही नहीं प्राइवेट अस्पताल में मरीजों को भी रेफर किया जाता है। वही दूर दराज से आए। हुए मरीजों का कहना है। हम सरकारी अस्पताल में इसलिए आते हैं ताकि कम पैसों में बेहतर इलाज हो सके, लेकिन यहां आने के बाद पता चलता है। किसी सरकारी अस्पताल की जिम्मेदारों का कोई और ही खेल है।वही डॉक्टर हमें अस्पताल की पर्ची पर बाहर की दवाइयां व अधिक से अधिक जांच भी लिखते हैं। जिससे इन लोगों को भारी कमीशन भी बड़े आसानी से मिल जाता है। अगर बात कर लिया जाए प्राइवेट तरफ से संचालित हो रहे पैथोलॉजी अल्ट्रासाउंड, की तो किसी भी संस्थान पर पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर, और नाही रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर होते है। और टेक्नीशियन के भरोसे, मरीज के जान खिलवाड़ करने में कोई भी कसर नहीं छोड़ थे है और टेक्नीशियन के भरोसे धड़ल्ले से संचालित करने में सफल दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं सुबह होते ही सरकारी अस्पतालों पर दलालों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। जैसे ही मरीज डॉक्टर के केबिन से दिखाकर बाहर निकलते हैं, लोग अपने-अपने सेंट्रो पर मरीजों को लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।

वही गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा हमें इस प्रकार की कोई जानकारी नहीं है। 

ब्यूरो रिपोर्ट गोरखपुर सुनील कुमार 

Prashant Yadav
Author: Prashant Yadav

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